सामान्य और असामान्य भू-चुंबकीय क्षेत्रों पर सूर्य-कलंक चक्रों के अधिचिह्न: भारत के भूमध्यरेखीय

भारत की विषुवतीय (एट्टयापुरम) और विषुवत रेखा से दूरस्थ (हैदराबाद) चुंबकीय वेधशालाओं से प्रधान घटक विश्लेषण (पी सी ए) का उपयोग करके दो दशकों (1980-2002) में 21-23 सूर्य-कलंक चक्रों पर विषुवतीय विद्युत्प्रधार (ई ई जे), प्रतिविद्युत्प्रधार (सी ई जे) के शांत समय अभिलक्षणों को और सौर शांत (एस क्यू) दिवस भूचुंबकीय क्षेत्र स्थापित किया गया है। सामान्य क्षेत्र के प्रतिमान दिखाते हैं कि दैनिक आयाम अन्य ऋतुओं की तुलना में विषुव के दौरान मजबूत थे। दैनिक आयाम सूर्य-कलंक चक्र के कमजोर पड़ने की प्रवृत्ति का अनुसरण करते हुए 21वें से 23वें सूर्य-कलंक उच्चिष्ठ तक घट गए हैं। मौसमी निमित्तों का विश्लेषण दर्शाता है कि सूर्य-कलंक चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं में सुबह और दोपहर की तुलना में शाम के सी ई जे अधिक स्पष्ट थे। सौर निम्निष्ट के दौरान दोपहर के सी ई जे की उपस्थिति के साथ असामान्य क्षेत्र विचरणों का एक मजबूत सहसंबंध है; सूर्य-कलंक चक्रों की प्रावस्थाओं के साथ सी ई जे की मौसमी उपस्थितियों के सहसंबंध को प्रकट किया गया है। पहला प्रधान घटक (पी सी1) ई ई जे और एस क्यू के प्रेक्षित दैनिक आयामों के साथ निकटता से सहसंबंध रखता है, जबकि अन्य प्रधान  घटक विषुवतीय वेधशाला पर दिवालोक समय के दौरान असामान्य विचरणों की उपस्थिति को प्रकट करते हैं।


उद्धरण

एन. फणि चंद्रशेखर और अर्का रॉय, जर्नल ऑफ जियोफिज़िकल रीसर्च: स्पेस फिज़िक्स,125, ई2020जेए028464

https://doi.org/10.1029/2020JA028464